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उत्तराखंड

कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति का कोटद्वार बंद रहा सफल

कोटद्वार। कण्व नगरी कोटद्वार से जुड़ी आम समस्या को लेकर कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति ने 20 सितंबर को बंद का आह्वान किया। जिसके बाद आज कोटद्वार का बाजार पूरी तरह से बंद रहा। बाजार बंद होने के कारण पूरे शहर में सन्नाटा पसरा रहा। कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति की मांग है कि अंग्रेजों के समय के ऐतिहासिक रामनगर-कालागढ़-पाखरों-कोटद्वार लालढांग-हरिद्वार सड़क मार्ग पर चलने वाली गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स कम्पनी की सेवा को बहाल किया जाए। अंग्रेजों की दी गई सौगात भारत नामदेव भूमि कण्वाश्रम एक्सप्रेस रेलगाड़ी बहाल हो।
इसके साथ ही कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति की मांग है कि उत्तराखंड निर्माण से पूर्व यूपी द्वारा मोटर नगर की आधुनिक बस अड्डा बनाने के लिए भूमि अदालत से मुक्त की जाए। कोटद्वार की सीवरेज की समुचित व्यवस्था कर उत्तर प्रदेश सरकार से पूर्व की भांति लीज की भूमि बहाल की जाए।पूर्व की भांति कोटद्वार सुखरो नदी के तट पर बने राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम से क्षेत्रीय जनता को कूड़ा डम्पिग जोन से उठने वाली दुर्गन्ध से मुक्ति दिलाई जाए। इन सभी मांगों को लेकर कोटद्वार शहर का बाजार, देवी मंदिर बाजार, दुर्गापुर बाजार और किशनपुर बाजार बंद रहा।
कोटद्वार संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कोटद्वार उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को ज्ञापन भी भेजा है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से आए यात्रियों को बाजार बंद होने की वजह से थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कोटद्वार बंद के कारण जीप, टैक्सी और जीएमओयू कम्पनी की बसें भी नहीं चली। टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष दीपक रावत ने बताया कि कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर कोटद्वार से टैक्सी संचालन बंद रहा। जीएमओयू कम्पनी के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल ने बताया कि कम्पनी की एक भी बस का संचालन नहीं किया गया।

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