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उत्तराखंड

अब हमारे कलाकार विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का हुनर दिखा पाएंगेः महाराज

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखण्ड की गौरवमयी लोक पारम्परिक एवं पौराणिक आध्यात्मिक लोक सांस्कृतिक विरासत भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में अपना अलग स्थान रखती है। उक्त बात प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, लोक निर्माण, सिंचाई, जलागम एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने बुद्धवार को नई दिल्ली स्थित आजाद भवन में भारत और विदेशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और राज्य सरकारों के बीच समझौता ज्ञापन के हस्ताक्षर समारोह में प्रतिभाग करते हुए अपने सम्बोधन में कही। उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद हमारे कलाकार विदेशों में अपनी प्रतिभा का हुनर दिखा पाएंगे और विदेशी कलाकारों की कला का हम साक्षात्कार कर पाएंगे। आईसीसीआर विदेश मंत्रालय की सांस्कृतिक शाखा है जो भारत और विदेशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का कार्य करती है।राज्य सरकारों के बीच आज लगभग 23 राज्यों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि आईसीसीआर विदेशों में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने और विदेशों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए राज्य सरकारों का सहयोग करना चाहती है जो कि एक ऐतिहासिक कदम है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज के इस आयोजन में सभी राज्यों को शामिल कर हस्ताक्षर समारोह का आयोजन किया गया है। श्री महाराज ने कहा कि अनादिकाल से उत्तराखण्ड की भूमि भारतीय दर्शन, चिन्तन, मनन, अध्यात्म, साधना, धर्म एवं संस्कृति का केन्द्र रही है। धर्म और दर्शन के साथ-साथ यहां की साहित्य, कला एवं संस्कृति ने वर्षों से भारतीय संस्कृति को परिष्कृत किया है। समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रख-रखाव एवं उन्नयन हेतु संगीत, नृत्य, नाटक, लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक कला आदि का विकास तथा इनका व्यापक प्रचार-प्रसार, प्राचीन पुरातात्विक स्थलों एवं स्मारकों का संरक्षण, सर्वेक्षण एवं प्राचीन अभिलेखों व दुर्लभ पाण्डुलिपियों को संग्रहीत कर उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखना अति आवश्यक है।

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